View NGO's blogs here:

My Blog List

Saturday, 24 November 2018

नई कार्यकारिणी सभा- 2018-23





                                                         S c h e d u l e - vi
(See Rule 14)
list of members to be maintained by the Governing body of a Society:
Name and address of the Society: Amar Bharati Gram Vikas Sanstha, Bicholim, Goa.
Registration No. of the Society under the Societies Registration Act, 1860: 96/Goa/2003
Sr.No.
Name and Address of the members
Date of Admission
Signature of the member
Remarks
01
Mr.Ram Pyare Singh Shastri
bicholim,goa
07/12/2002

President
02
Mrs. Swarupa Rajput
Bicholim,Goa
07/12/2002

Vice President
03
Mr. Jayant Rajput
Bicholim, Goa
07/12/2002

Secretary
04
Mrs.Vaidehi Singh
Bicholim, Goa
07/12/2002

Treasurer
 05
Shri Ram Singh
Vill. Masjidia, PO. Bishunpura Bazar,Deoria. U.P.
20/10/2009

Member

06
 Mrs. Seema Singh
Vill. Masjidia, P.O. Bishunpura Bazar,Deoria.U.P.
29/10/2009

Member

07
Ms. Shilpa Sakhalkar
Sanquelim, Goa
24/07/2003

Spl. member
08
Mr. Kashinath Mane
Margao, Goa
25/07/2003

Member

09
Mr. Rajesh Mane
Margao, Goa
25/07/2003

Member

10
Ms. Asmita Rajput
Bicholim, Goa
08/08/2010

Member

11
Mrs. Radha Lokre
Bicholim, Goa
25/07/2003

Member

12
Mrs. Jeeya J. Rajput
Bicholim, Goa
06/11/2005

Member

13
Mr. Janardan Bhandare
Khed,Ratnagiri,(M.H.)
15/01/2006

Member

14
Mr. Rajesh Bhandare
Khed, Ratnagiri(M.H.)
15/01/2006

Member

15
Mr. Rakesh Bhandare
Khed, Ratnagiri(M.H.)
15/01/2006

Member

16
Mrs. Anandi Rajput
Bicholim, Goa
15/01/2006

Spl.Member

17
Mr. Shailesh V. Padelkar
Narayan Nagar,Honda, Sattari, Goa
31/03/2008

Spl.Member
18
Ms.  Nidhi Singh
Bicholim.Goa
25/09/2016

 Joint Secretary

19
 Ms. T.N. Shivani
9-29/2 Turangi, Kakinada-533016 A.P.
07/12/2016

Member

20
 Ms. C. Jayalaxmi
1-103, Salkarpet, PO. Thoodukurthy-509235 T.S.
07/12/2016

Member

ORDER AND IN THE NAME OF THE ADMINISTRATOR OF GOA, DAMAN AND DIU.
CERTIFIED BY PRESIDENT:

Saturday, 27 June 2015

YEAR WISE AUDITED ACCOUNT OF NGO. :



Amar Bharati Gram Vikas Sanstha, Bicholim, Goa


AUDITED ACCOUNT YEAR WISE OF  NGO:







                                           (  In INR .)


SR.NO.
   YEAR
INCOME
EXPENDITURE
BALANCE
01
2003-04
11000
10500
500
02
2004-05
12965
12250
715
03
2005-06
16708
15537
1171
04
2006-07
22412
20352
2060
05
2007-08
23052
20844
2208
06
2008-09
67049
65682
1367
07
2009-10
63508
60834
2674
08
2010-11
137325
135287
2038
09
2011-12
167107
164909
2198
10
2012-13
164965
161510
3455
11
2013-14
222624
218000
4624
12
2014-15
211825
206500
5325


TOTAL:
11,20540
10,92205
28335

Friday, 25 July 2014

Message from founder/chairman:

  Amar Bharati Gram Vikas Sanstha, Bicholim, Goa                                                    



                                                                                     Mr. Ram Pyare Singh Shastri 
M.A. (Hindi-Sanskrit),  
 B.Ed., P.G.D. Rural Development, 
C.I.G. (Guidance). Ph.D.(Social Work)
Contact No. 9247352663
E.mail:    rps61_3@yahoo.in
amarbharatigoa@gmail.com



         ग्राम विकासेन राष्ट्रविकासं सम्भवमस्ति।' गाँवों के विकास से ही राष्ट्र का विकास संभव है।'
भारत गाँवों का देश है। यहाँ की 75 प्रतिशत जनता गाँवों में रहती है।  शहरों के अधिकांश लोग गाँवों से ही जुड़े रहते हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार कृषि है। कृषि मानसून पर निर्भर करती है- कहीं सूखा तो कहीं बाढ़। दोनों ही स्थितियों में कृषि उपज का काफी नुकसान होता है। परिणाम स्वरूप अन्न पैदा करने वाले किसान खुद भूखमरी के शिकार हो जाते हैं। कृषि के लिए लिये गए कर्ज़ को वे भुगतान नहीं कर पाते हैं। ऐसी स्थिति में अधिकांश किसानों के सामने आत्महत्या करने के अलावा और कोई दूसरा रास्ता शेष नहीं रहता है। कृषि उत्पाद में कमी के कारण शहरों में भी महँगाई बढ़ जाती है। इन समस्याओं से निपटने के लिए सरकारें कोई ठोस, स्थाई और कारगर योजनाएं नहीं बनाती हैं । प्रतिवर्ष करोड़ों रूपये पानी में बहा दिए जाते हैं। नदियों से नहरें निकाल कर बाढ़ वाले इलाकों का पानी सूखाग्रस्त इलाकों में छोड़ कर बाढ़ और सूखा दोनों पर नियंत्रण पाया जा सकता है। यह कार्य केन्द्र सरकार के द्वारा ही किया जाना चाहिए। अधिक से अधिक पेड़ों को लगाकर प्रकृति और मानसून के संतुलन को कायम रखा जा सकता है एवं बढ़ते हुए प्रदूषण पर नियंत्रण  पाया जा सकता है।
     
     ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं जैसे शिक्षा, चिकित्सा, यातायात (परिवहन) इत्यादि का अभाव होता है। प्रायः देखा जाता है कि जिन- जिन गाँवों से होकर पक्की सड़कें शहरों को जाती है, उन गाँवों का विकास जिन गाँवों से होकर सड़कें और रेलवे नहीं जाती है की तुलना में काफी तेज़ी से हुआ है, क्योंकि रेलवे और पक्की सड़कें गाँवों के करीब होने से  ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे सुबह अपने गाँव से दूर शहर जाकर अपनी पढ़ाई करके शाम को अपने घर वापस आ जाते हैं, उन्हें शहर में रहने की जरूरत नहीं पड़ती। गाँव के लोग अपने परिवार के बीमार सदस्यों का इलाज़ शहर के अच्छे डॉक्टरों से कराकर बस या ट्रेन से अपने घर वापस आ जाते हैं। ग्रामीण लोग शहर से अच्छे खाद-बीज लाकर अपनी कृषि की उपज़ को बढ़ाते हैं तथा अपनी कृषि उपज़ अनाज़, शाक-सब्जियाँ, फल इत्यादि शहर की मंडियों में ले जाकर अच्छे दामों में बेंचकर शाम को अपने गाँव वापस आ जाते हैं। वहीं जिन गाँवों से होकर पक्की सड़कें या रेल्वे नहीं जाती हैं वे गाँव इन सब सुविधाओं से वंचित रहते हैं । वे गाँव आज भी अविकसित हैं। ऐसे ही गाँवों के विकास हेतु अमर भारती ग्राम विकास संस्था की स्थापना की गई है, जिसका उद्देश्य हैः- ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए विद्यालय, महाविद्यालय, गुरूकुल, अनाथाश्रम, नईतालीम केन्द्रों, महिला विद्यापीठों की स्थापना करना, जैविकीय कृषि और कृषि में नई तकनीक के प्रयोग को बढ़ावा देना, हिंदी और संस्कृत का प्रचार और प्रसार करना, कुटीर एवं गृह उद्योगों को बढ़ावा देना, ग्रामीण महिलाओं को सबल बनाना, ग्रामीण लोगों को उनके अधिकारों और कर्तव्यों का ज्ञान कराना ताकि कोई उनका शोषण न कर सके, ग्रामीण भागों में आयुर्वेद, योग एवं भारतीय चिकित्सा पद्धतियों का प्रचार-प्रसार करना इत्यादि जिससे ग्रामीण लोगों का जीवन स्तर ऊँचा उठ सके और गाँवों से शहरों की ओर हो रहे पलायन को कम किया जा सके।
      
      गाँवों के विकास से ही राष्ट्र का विकास सम्भव हैलेकिन अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता।' इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु सरकारी अनुदान, दाताओं द्वारा दान की एवं सेवाभावी लोगों के बहुमूल्य सहयोग की आवश्यकता है। उदार दातागण अपने दान को संस्था के नाम चेक या नकद संस्था के बैंक खाते में भुगतान करके कर सकते हैं। आर्थिक रूप से  समृद्ध सेवाभावी लोग अपने-अपने क्षेत्र में संस्था की शाखा खोलकर संस्था के उद्देश्यों के अनुरूप कार्य कर सकते हैं। संस्था का कार्य क्षेत्र सम्पूर्ण ग्रामीण भारत है।
      
    संस्था की एक शाखा उ०प्र०  के देवरिया जनपद के मसजिदिया गाँव (बिहार की सीमा पर) में खोला गया है जहाँ पर एक ग्रामीण महिला विद्यापीठ खोलने का प्रस्ताव रखा गया है किन्तु फण्ड के अभाव में यह कार्य लम्बित है।